पंजाब ने भारत का पहला सडक़ सुरक्षा बल शुरू किया, जिससे सडक़ दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में रिकॉर्ड 50.12 प्रतिशत की कमी आई। सडक़ सुरक्षा फोर्स ने अब तक 47,000 से अधिक दुर्घटना पीडि़तों को समय पर सहायता प्रदान की है। पंजाब में सडक़ सुरक्षा फोर्स के गठन के बाद सडक़ सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार दर्ज किया गया है। किसी भी तरह की दुर्घटना की स्थिति में एसएसएफ की तत्काल पहुंच, पीडि़तों को प्राथमिक सहायता और समय पर इलाज मिलने के कारण राज्य में सडक़ हादसों में मौतों की दर में कमी आई।
पंजाब की सडक़ सुरक्षा फोर्स में मौजूदा वक्त में करीब 1500 कर्मचारी तैनात हैं। इन्हें 144 अत्याधुनिक व पूर्ण रूप से सुसज्जित वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। राज्य में औसतन हर 30 किलोमीटर पर इस फोर्स की एक टीम तैनात रहती है। किसी भी तरह की सडक़ दुर्घटना होने पर यह फोर्स औसतन 6 से 6.5 मिनट में मदद के लिए पहुंच जाती है। आधुनिक उपकरणों जैसेकटर और फस्र्ट एड किट सेलैस येगाडिय़ां एआई और बैकएंड सपोर्ट की मदद से लगातार काम कर सडक़ हादसों में होने वाली जन हानि की रोकथाम कर रही हैं। इस फोर्स की मौजूदगी सेन सिर्फ हादसों में कमी आई है, बल्कि हाईवे पर होने वाली लूट और चोरी की घटनाओं पर भी लगाम लगी है।
एसएसएफ की गाडिय़ों में एक्सीडेंट के दौरान फंसे लोगों को निकालने के लिए कटर, प्राथमिक उपचार के लिए फस्र्ट एड बॉक्स और अन्य रेस्क्यू टूल्स मौजूद रहते हैं। हाईवे पर हर 30 किलोमीटर पर इनकी मौजूदगी ने यात्रियों के मन में सुरक्षा का भाव पैदा किया है। सडक़ सुरक्षा फोर्स ने केवल जान ही नहीं बचाई, बल्कि अपराध पर भी चोट की है। हाईवे पर गश्त बढऩे से लूटपाट और चोरी की वारदातों में भारी कमी आई है। लोग अब देर रात भी हाईवे पर सफर करते समय एसएसएफ की गाडिय़ों को देखकर खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।


