तमिलनाडु की राजनीति में करूर भगदड़ कांड को लेकर मचे भारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) को मद्रास हाई कोर्ट से एक बड़ी फौरी राहत मिली है। तमाम राजनीतिक विरोधों को दरकिनार करते हुए अदालत ने सीएम विजय को इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र बांटने की हरी झंडी दे दी है। अदालत के इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री आज ही करूर पहुंचकर 32 पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे और उन्हें अनुकंपा के आधार पर नौकरी के पत्र सौंपेंगे।
हाई कोर्ट ने लगाई सख्त शर्त, अभी नहीं मिलेगी पहली सैलरी
हालांकि, नियुक्ति पत्र बांटने की छूट देते हुए अदालत ने कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं। जस्टिस सीवी कार्तिकेयन और जस्टिस आर शक्तिवेल की खंडपीठ ने स्पष्ट आदेश दिया है कि फिलहाल दी जा रही ये नौकरियां पूरी तरह से अस्थायी होंगी। जब तक इस पूरे मामले की अदालत में दोबारा सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक इन नियुक्त लोगों को उनका पहला वेतन (सैलरी) जारी नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से एक विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है, जिसमें यह बताने को कहा गया है कि इन सरकारी नियुक्तियों में सभी तय नियमों का सख्ती से पालन किया गया है या नहीं।
विपक्ष का भारी विरोध, वामपंथी दलों ने भी खोला मोर्चा
मुख्यमंत्री के इस कदम का विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया है। द्रमुक (DMK) ने तो इस दौरे को रोकने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका आरोप था कि सीबीआई (CBI) इस भगदड़ की जांच कर रही है और सीएम के वहां जाने से गवाह प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन कोर्ट से उन्हें मायूसी हाथ लगी। दूसरी ओर, सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने भी इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वामपंथी नेताओं का तर्क है कि चूंकि यह हादसा टीवीके (TVK) की राजनीतिक रैली में हुआ था, इसलिए मुआवजे का पूरा वित्तीय बोझ पार्टी को उठाना चाहिए, न कि इसका भार सरकारी खजाने पर डाला जाए।
1700 करोड़ की फैक्ट्री की रखेंगे नींव, चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात
इस संवेदनशील दौरे पर नियुक्ति पत्र सौंपने के अलावा, मुख्यमंत्री विजय आज करूर में 1,700 करोड़ रुपये की विशाल लागत से बनने वाले एक गैर-चमड़ा जूता-चप्पल कारखाने की आधारशिला भी रखेंगे। माना जा रहा है कि इस बड़े प्रोजेक्ट से राज्य के करीब 13,500 लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सीएम के दौरे और राजनीतिक तनाव को देखते हुए पूरे करूर शहर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के लिए लगभग 6,500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। आपको बता दें कि 27 सितंबर 2025 को टीवीके की रैली में मची भयानक भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके लिए मुख्यमंत्री विजय पहले ही 20-20 लाख रुपये की आर्थिक मदद दे चुके हैं।


