Thursday, July 23, 2026
Google search engine
Homeदेशभ्रष्टाचार के दोषियों को मिले फांसी…’ राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर...

भ्रष्टाचार के दोषियों को मिले फांसी…’ राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार अब हमारे समाज में एक सामान्य बात बन चुकी है। राम मंदिर के लिए आए दान में हुई चोरी का मामला भी लोगों को शर्मिंदा नहीं कर पाया, जो समाज में ईमानदारी के सबसे निचले स्तर को दिखाता है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि अगर सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना चाहती है, तो उसे भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन कर गंभीर मामलों में मृत्युदंड की सजा का प्रावधान करने पर विचार करना चाहिए।

रिश्वतखोर अफसरों और बिल्डरों पर फूटा कोर्ट का गुस्सा

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थनंद की खंडपीठ हमीरपुर के कैफुद्दीन सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बुलडोजर कार्रवाई से संरक्षण की मांग की गई थी। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि नगर निगम और अन्य प्राधिकरणों के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण खड़े किए जाते हैं। अफसर रिश्वत लेकर अपनी आंखें बंद कर लेते हैं, लेकिन जब कार्रवाई की नौबत आती है तो उसका सबसे बड़ा खामियाजा आम खरीदार को भुगतना पड़ता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण कराने वाले बिल्डरों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वाले भ्रष्ट अधिकारियों को भी कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि भ्रष्टाचार के चलते अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार गहरी हो रही है, जो भविष्य में गंभीर सामाजिक असंतोष का कारण बन सकती है।

राम मंदिर में चोरी से भी नहीं जागी शर्म!

अपने 51 पन्नों के फैसले में जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा कि राम मंदिर में दान चोरी का विवाद ‘ऊंट की पीठ पर आखिरी तिनका’ साबित हुआ है। इतने संवेदनशील और पवित्र धार्मिक स्थल पर हुई चोरी से भी अगर समाज विचलित नहीं होता है, तो यह सब्र का बांध टूटने जैसा है। अदालत ने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 182 देशों की सूची में भारत 91वें स्थान पर है, लेकिन फिर भी भ्रष्टाचार को लेकर समाज में कोई संवेदनशीलता नजर नहीं आती। इसी को आधार बनाते हुए कोर्ट ने सरकार को भ्रष्टाचार निरोधक कानून-1988 में संशोधन कर मृत्युदंड का प्रावधान जोड़ने का सुझाव दिया है।

बुलडोजर एक्शन पर अहम निर्देश और जजों की अलग राय

अवैध निर्माण और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर हाई कोर्ट ने कई अहम निर्देश भी दिए। अदालत ने कहा कि किसी आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद कम से कम 2 साल तक उसका मकान ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, यदि कोई व्यक्ति किसी मकान में 3 साल या उससे ज्यादा समय से रह रहा है, तो ध्वस्तीकरण से एक साल पहले उसे नोटिस देकर वैकल्पिक व्यवस्था का मौका दिया जाना चाहिए। हालांकि, इस विशिष्ट बिंदु पर जस्टिस सिद्धार्थनंद ने अपनी असहमति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट 2 साल जैसी कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसा करने से भविष्य में आरोपी कार्रवाई से बचने के लिए एफआईआर का दुरुपयोग कर सकते हैं।

Our Best Partners: paff casino uudet kasinot ilmaista pelirahaa best lucky jet app horários fortune rabbit melhor horário para jogar piggy gold https://luckyjetwins.com/signals/ touro do jogo aviator predictor id password create Pin-Up Casino ট্র্যাকসিনো
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments