भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खेमे से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी सियासी हलचल सामने आई है। टीवी डिबेट्स में विरोधियों के पसीने छुड़ाने वाले बीजेपी के सबसे चर्चित और तेजतर्रार राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के पार्टी छोड़ने की खबरें तेजी से फैल रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पूनावाला ने बीजेपी की सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सोशल मीडिया पर उनके हालिया कदम और बयानों ने इन अटकलों को पूरी तरह से पुख्ता कर दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
‘X’ से हटाया बीजेपी का नाम, नया बायो किया अपडेट
इस पूरी सियासी हलचल की सुगबुगाहट तब शुरू हुई जब शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपना बायो अचानक बदल दिया। उन्होंने अपने प्रोफाइल से ‘बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता’ का पद हटा दिया है। पूनावाला ने गुरुवार को अपने इस नए अपडेटेड बायो का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया, जिसमें उन्होंने खुद को ‘धर्म से इस्लाम, संस्कृति से हिंदू और विचारधारा से भारतीय’ बताया है। इसके साथ ही उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आजीवन अनुयायी भी लिखा है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इस बड़े बदलाव के बावजूद उनके इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर अभी भी उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय प्रवक्ता ही दर्शाया जा रहा है।
पुराने वीडियो शेयर कर सक्रिय राजनीति छोड़ने का किया जिक्र
पार्टी से इस्तीफे की अटकलों को हवा देते हुए शहजाद पूनावाला ने अपने दो पुराने इंटरव्यू क्लिप भी एक्स पर रीपोस्ट किए हैं, जो 28 जून और 9 जुलाई के हैं। इन वीडियोज में वह सक्रिय राजनीति से किनारा करने और समाज सेवा से जुड़ने की बात कहते नजर आ रहे हैं। उन्होंने एक वीडियो में साफ कहा था कि वह चुनावों के बाद राजनीति छोड़ने का मन बना चुके थे, लेकिन तीसरी बार सत्ता में लौटने के बाद पीएम मोदी को भावुक देखकर उन्होंने अपना इरादा बदल लिया था। उन्होंने बंगाल, दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे अहम विधानसभा चुनावों में जीत का संदेश देने के बाद ही सक्रिय राजनीति से हटने का संकल्प लिया था।
कांग्रेस से बगावत कर 2021 में संभाला था बीजेपी का मोर्चा
विपक्ष के सबसे मुखर आलोचकों में गिने जाने वाले 38 वर्षीय वकील और एक्टिविस्ट शहजाद पूनावाला का सियासी सफर हमेशा से काफी चर्चा में रहा है। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कांग्रेस पार्टी के साथ की थी, लेकिन साल 2017 में वह तब रातों-रात सुर्खियों में आ गए जब उन्होंने राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने का कड़ा विरोध किया था। परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति के खिलाफ अपनी ही पार्टी से बगावत करने के बाद उन्होंने अलग रास्ता चुन लिया था। साल 2021 में उन्हें दिल्ली में बीजेपी के सोशल मीडिया विंग का इंचार्ज बनाया गया था और तब से वह हर बड़े मंच पर पार्टी का मजबूती से पक्ष रखते आ रहे थे। अब उनके इस संभावित संन्यास ने सबको हैरत में डाल दिया है।


