Thursday, March 19, 2026
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Bhopal बनेगा साहित्य नगरी, mayor ने भेजा प्रस्ताव; UNESCO भेजा जाएगा डोजियर

यूनेस्को द्वारा ग्वालियर को सिटी ऑफ म्यूजिक घोषित करने के बाद अब भोपाल को साहित्य नगरी घोषित कराने की पहल शुरू की जा रही है। इसके लिए मध्य प्रदेश के संस्कृति और पर्यटन विभाग मंथन करके डोजियर तैयार किया है, जिसे मंगलवार को महापौर मालती राय के हस्ताक्षर के बाद संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार को भेजा गया। वहां से इसे यूनेस्को भेजा जाएगा।

भोपाल साहित्यिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध

प्रस्ताव पर मजबूत तर्क रखने और आगामी तैयारी के लिए मंगलवार को मुल्ला रमुजी संस्कृति भवन,बाणगंगा में हितधारक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश के संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, संस्कृति और पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला,संबंधित विभागों के अधिकारी, लेखक, साहित्यकार और ग्रंथालयों के प्रमुख मौजूद रहे।
बता दें कि भोपाल साहित्यिक गतिविधियों के लिए देश के बड़े शहरों में प्रमुख है। इस मौके मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और नैसर्गिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध भोपाल को विश्व की साहित्य नगरी के रूप में पहचान दिलाई जाएगी। इससे स्थानीय साहित्य और साहित्यकारों को वैश्विक मंच मिलेगा। साथ ही भोपाल के शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को गति मिलेगी।

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को भेजा गया प्रस्ताव

प्रमुख सचिव संस्कृति और पर्यटन शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि यूनेस्को ने साहित्य के श्रेत्र में 39 देशों के 53 शहरों को क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में शामिल किया है। पिछले वर्ष केरल के कोझिकोड शहर को यूनेस्को ने साहित्य के क्षेत्र में शामिल किया था। भोपाल को देश का दूसरा शहर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए डोजियर को मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा तैयार किया गया है। इसे आज ऑनलाइन माध्यम से संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को भेजा गया है।
संस्कृति मंत्रालय द्वारा अनुमोदित होने पर डोजियर यूनेस्को को मूल्यांकन के लिए प्रेषित किया जाएगा। संगोष्ठी में प्रेजेंटेश के माध्यम से हितधारकों को शहर में हो रहे साहित्यिक कार्यक्रम और गतिविधियों, संकलन, प्रदर्शनी और आयोजन की जानकारी के साथ अगले चार वर्षों में साहित्य के प्रचार-प्रसार और संवर्धन के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर चर्चा की गई।
बता दें कि यूनेस्को द्वारा क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में शहरों को सात श्रेणियों में मान्यता दी जाती है। इसमें शिल्प और लोक कला, रचना, फिल्म, पाक कला, साहित्य, संगीत और मीडिया आर्ट शामिल है। यह है प्रमुख आधार भोपाल में राजा भोज से लेकर अब तब कई बड़े लेखक और साहित्यकारों का जन्म स्थान और रहवास रहा है।
हिंदी के साथ-साथ उर्दू, सिंधी, पंजाबी आदि भाषाओं में साहित्यकारों द्वारा भोपाल में साहित्य सृजन किया गया है। यहां के साहित्यकार सर्वाधिक सक्रिय हैं, सबसे ज्यादा साहित्यिक संस्थाएं हैं और सबसे ज्यादा साहित्यिक कार्यक्रम भोपाल में होते हैं।राजधानी में वर्तमान में करीब 20 पद्मश्री लेखक और साहित्यकार निवासरत हैं।
यह दुष्यंत कुमार, प्रभाकर श्रोत्रिय,मुल्ला रमुजी, प्रभुदयाल अग्निहोत्री, शरद जोशी, जहीर कुरैशी, मंजूर ऐहतेशाम, कैफ भोपाली जैसे साहित्यकारों का शहर है।
भोपाल के वर्तमान साहित्यकारों में रमेशचंद्र शाह, ज्ञान चतुर्वेदी, कैलाशचंद्र पंत, मंजर भोपाली, बशीर बद्र, यतींद्रनाथ राही, डा. विजय बहादुर सिंह, संतोष चौबे, डा. बिनय राजाराम, राजेश जोशी, मेहरुन्निशा परवेज,गोविंद मिश्र जैसे और भी कई बड़े साहित्यकारों की लंबी सूची है,जो आज अपनी लेखनी के माध्यम से अखिल भारतीय स्तर पर भोपाल की प्रतिष्ठा-स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

साहित्यिक सम्मेलनों में भी आगे

भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन 2015 में हो चुका है। साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली का सम्मेलन उन्मेष वर्ष 2023 में हुआ था। निजी स्तर पर भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल का आयोजन पिछले आठ सालों से हो रहा है और कला और साहित्य महोत्सव विश्वरंग का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है। इसके अतिरिक्त हर दिन कोई न कोई साहित्यिक गतिविधि शहर में आयोजित होती है।

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